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Day 12 (Sometimes he thinks he is Prophet)

आसिफ को पता चलता है कि बचपन से लेकर आज तक उसके साथ अजीब सी घटनाएं हुई है जिसे वह समझ नहीं सका।
           पर वह इतना जान क्या है कि वह सामान्य व्यक्तियों से बिल्कुल अलग है।उसे पता चलता है कि उसके बातें सच हो रही है। वह सोचने लगता है कि क्या मैं एक प्रोफेट(Prophet) हूं। उसे वो दिखाई और सुनाई देने लगा है जो बाकी लोगों को नहीं दिखता। बचपन में उसके साथ हुई घटनाएं जो भविष्य के बारे में कहती है। उसे खुद पर यकीन नहीं होता पर वह खुद पर यकीन करता है।
     आखिरकार उसे समझ आ ही गया कि आखिर में वह है कौन। वो खुद  से कहता है
Prophet-Man who's words come true

मैंने खुद को समझने में बड़ी देर कर दी। उसे यह समझ नहीं आया कि यह सब कैसे होता है।
        लोग वर्तमान से भविष्य को बदलते हैं पर मैंने तो भविष्य से वर्तमान को बदल दिया।

मैंने वर्तमान से भविष्य को बदलते हुए सुना है
 पर भविष्य से वर्तमान को बदलते हुए नहीं ।

          आसिफ मुस्कुराता है।

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जब कोई किसी का इंतजार करता है तो कुछ लोग अपनी निगाहें जमीन में गड़ाय रखते हैं तो कुछ लोग आसपास से गुजरने वालों को देखते है।मुझे नहीं मालूम की आखिर मै ऐसा क्यों करता हूं ये उस हवा के झोंके जैसा है जिस से पौधे कुछ अंश तक झुक जाते हैंऔर हवा के गुजरने के बाद फिर अपनी जगह पर आ जाते हैं।               रास्ते में चलते हुए उसे खंभा नजर आता है जिस का ऊपरी हिस्सा किसी चीज से सटा हुआ था। खंभा सिलेंडर के आकार में था। खंभे के आधे भाग में सूर्य का प्रकाश था और ठीक आधे भाग में छांव था। प्रकाश और छांव के मेल से खंभे पर दो लकीर बन रही थी ।और उसकी एक लकीर पर चीटियां खंभे के ऊपर  चढ़ रही थी ।और कुछ चीटियां नीचे उतर रही थी ।ऊपर जाने वाले चीटियों की संख्या ज्यादा थी जबकि नीचे उतरने वाले चीटियों की संख्या कम। उन चीटियों के आधे भाग में प्रकाश था और आधे भाग में छांव।                     एक जगह मैंने देखा कि कुछ लोग अंदर जा रहे थे और कुछ लोग बाहर निकल रहे थे। मैं कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा मैंने रास्ते में जाते हुए एक आदम...