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Day 1 (Walking)

वह पहाड़ों के नजदीक जाने लगा। एक पेड़ के नीचे जाकर रुका और अपनी नजरें पहाड़ों की चोटियों पर गड़ाई। पहाड़ों के किनारे बसे गांव को देखता है। पत्थर तोड़ते मजदूरों को देखता है। रास्ता जिन्हें मजदूरों ने बनाई है अपनी हाथों की परवाह किए बगैर। वो सड़क जो किसी दूसरे सड़क से जुड़ती है और अपना काम पूरा करती है। न जाने कितने लोगों को उसने वहां पहुंचाया जहां वे पहुंचना चाहते थे। उसका नाम जो सिर्फ वही जानता था क्योंकि उसे जानने वाले अब जिंदा न थे। नियम जो प्रकृति ने बनाए है नियम जिसे तोड़ा नहीं जा सकता । प्रकृति जो अपने नियमों को पूरा करती है।     
                बुढ़ापा कुछ लोगों के लिए वो समय जो अपने परिवार के साथ बिताना। वो बुढ़ापा जो गति कम कर देती है। वो बुढापा जिसका अहसास बचपन में नहीं किया जा सकता। कुछ के लिए अपने सपनों को पूरा करना हो सकता है तो कुछ के लिए आराम। वो बुढापा जिसमें किसी ने सहारा ना दिया।       
                     पहाड़ के किनारे बने सड़कों में चलते हुए पेड़ों को देखता है ।कुछ की पत्तियां गिर चुकी है तो कुछ की नई पत्तियां उग रही है ।जमीन में गिरी सूखी पत्तियोंकी मदद से कुछ पौधे उग रहे हैं लगता है जैसे वे बड़े पेड़ का धन्यवाद दे रहे हैं। पोधे जिन्हें बकरियां खा रही है
                हर कोई एक दूसरे पर निर्भर है। हर कोई एक-दूसरे को आभार व्यक्त करते नजर आता है। पानी की बूंदे पत्तियों पर गिर रही है।जिसका दबाव पत्तियां आसानी से झेल सकती है।  रास्ते के किनारे में लगे पत्थर जो कुछ संकेत देते हैं।२ किलोमीटर चलकर थोड़ी देर ठहरता है। लाठी जिसने उसे कुछ सहारा दिया। कुछ दूर उसे कुछ लोग दिखे जमीन को देखते हुए कुछ बातें कर रहे थे मैंने पास जाकर कहा मुझे नहीं लगता कि यहां फसल उग पाएगी  तब उन्होंने एकटक मेरी ओर देखा फिर एक ने कहा हम यहां एक पाइप लाइन बिछाने चाहते हैं जो कि एक खास मकसद के लिए लगाई जाएगी फिर मैंने आगे कुछ ना कहा ।
                     कुछ सवालों का जवाब देना बहुत ही आसान लगता है लेकिन कुछ सवालों का जवाब उतना ही कठिन । कुछ सवालों के जवाब आपको आसपास के लोग देते हैं तो कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनका जवाब  आपको खुद खोजना पड़ता है इस आशा में कि उसका जवाब मिल पाएगा या नहीं।

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Day 2 ( Observing)

जब कोई किसी का इंतजार करता है तो कुछ लोग अपनी निगाहें जमीन में गड़ाय रखते हैं तो कुछ लोग आसपास से गुजरने वालों को देखते है।मुझे नहीं मालूम की आखिर मै ऐसा क्यों करता हूं ये उस हवा के झोंके जैसा है जिस से पौधे कुछ अंश तक झुक जाते हैंऔर हवा के गुजरने के बाद फिर अपनी जगह पर आ जाते हैं।               रास्ते में चलते हुए उसे खंभा नजर आता है जिस का ऊपरी हिस्सा किसी चीज से सटा हुआ था। खंभा सिलेंडर के आकार में था। खंभे के आधे भाग में सूर्य का प्रकाश था और ठीक आधे भाग में छांव था। प्रकाश और छांव के मेल से खंभे पर दो लकीर बन रही थी ।और उसकी एक लकीर पर चीटियां खंभे के ऊपर  चढ़ रही थी ।और कुछ चीटियां नीचे उतर रही थी ।ऊपर जाने वाले चीटियों की संख्या ज्यादा थी जबकि नीचे उतरने वाले चीटियों की संख्या कम। उन चीटियों के आधे भाग में प्रकाश था और आधे भाग में छांव।                     एक जगह मैंने देखा कि कुछ लोग अंदर जा रहे थे और कुछ लोग बाहर निकल रहे थे। मैं कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा मैंने रास्ते में जाते हुए एक आदम...