आसिफ को दूसरा मौका आसिफ अपने बिस्तर के किनारे बैठा था, खिड़की से बाहर टिमटिमाती स्ट्रीटलाइट को देख रहा था। कमरा शांत था, सिर्फ दूर से आती गाड़ियों के हॉर्न की आवाज़ कभी-कभी सुनाई दे रही थी। यह साल उसके लिए बहुत मुश्किल भरा रहा था। एक साल पहले तक, उसकी जिंदगी बिल्कुल सही थी—एक अच्छी नौकरी, प्यार करने वाली पत्नी और एक सुरक्षित भविष्य। लेकिन एक गलती, एक लापरवाही का पल, और सबकुछ बिखर गया। उसने गलत लोगों पर भरोसा किया, एक खराब आर्थिक फैसला लिया, और देखते ही देखते, कर्ज में डूब गया। उसकी पत्नी, इस तनाव को सहन न कर सकी और उसे छोड़कर चली गई। उसके बॉस, जो कभी उसकी तारीफ किया करते थे, ने उसे नौकरी से निकाल दिया। अब वह इस विशाल और बेरहम शहर में बस एक और संघर्ष करता हुआ इंसान बन गया था। एक शाम, जब वह यूं ही बिना किसी मकसद के सड़कों पर भटक रहा था, तो उसे एक पुरानी किताबों की दुकान दिखी। अंदर से आती हल्की रोशनी ने उसे आकर्षित किया और वह भीतर चला गया। दुकान लगभग खाली थी, बस एक बूढ़े आदमी ने काउंटर के पीछे बैठे-बैठे उसे देखा। "तुम्हें देखकर लगता है कि तुम खोए हुए हो," बूढ़े आदमी ने चश्मा...
Comments